21.सिविल सर्विस ,मंत्री और जन-प्रतिनिधि
21. सिविल सर्विस , मंत्री और जन-प्रतिनिधि सिविल सेवा , और चुने गए जन-प्रतिनिधियों के बीच के आपसी सम्बन्धों का भारत की शासन-प्रणाली में बहुत महत्त्व है।श्री शिबू-सोरेन के प्रधानमंत्री को मेरे स्थानांतरण के संदर्भ में लिखे पत्र और मेरे उसके प्रत्युत्तर से इस मौलिक विषय पर कई सवाल उठते हैं। यही सवाल कैबिनेट सेक्रेटरी , सांसद , प्रशासनिक अधिकारियों तथा भारत- सरकार के सरकारी उपक्रमों के अध्यक्ष-सह-प्रबंधक निदेशकों के साथ हुई मेरी अनेक संवाद-शृंखलाओं में भी सामने आए।ये प्रश्न केंद्र या केवल कोल मंत्रालय से ही संबंधित नहीं हैं | ऐसे ही कई मुद्दे समय-समय पर , जब मैं राज्य-सरकार में काम कर रहा था , तब भी उठते रहे हैं , जिसका मैंने इस किताब के भाग- 1 में जिक्र किया हैं | विगत कई वर्षों से प्रशासनिक अधिकारियों तथा चुने गए प्रतिनिधियों के बीच संबंध बहुत बिगड़ गए हैं या तो पूरी तरह से विरोधात्मक हैं या फिर मिलीभगत के । जबकि एक अच्छा प्रशासन चलाने के लिए ये संबंध सौहार्द्रपूर्ण तथा सहयोगी होने चाहिए थे । यह भारत की शासन-प्रणाली के कमज...